शोध केंद्र किस उद्देश्य से कार्य करता है
छह स्थायी प्रतिबद्धताएँ जो केंद्र के कार्यक्रम को परिभाषित करती हैं और जिनके आधार पर उसके कार्य की प्रतिवर्ष समीक्षा की जाती है।
- प्राथमिक प्रमाण तैयार करना। राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय सर्वेक्षण, क्षेत्रीय अध्ययन और संस्थागत आकलन करना, जिनसे यह स्थापित हो कि विधिक और संवैधानिक जागरूकता वास्तव में किस स्तर पर है।
- राष्ट्रीय फ्रेमवर्क और मानक प्रकाशित करना। प्रमाणों को ऐसे क्रियान्वयन-योग्य मानकों में बदलना जिन्हें कोई भी विद्यालय, कार्यस्थल या सार्वजनिक निकाय स्वेच्छा से अपना सके।
- सुलभ नीति विश्लेषण प्रस्तुत करना। ऐसे नीति संक्षेप और पत्र लिखना जिन्हें विधिक पृष्ठभूमि के बिना भी कोई निर्णयकर्ता एक ही बैठक में पढ़कर उन पर कार्य कर सके।
- शैक्षणिक सहयोग विकसित करना। विश्वविद्यालयों, विधि महाविद्यालयों और शोध केंद्रों के साथ कार्य करना ताकि निष्कर्षों की समीक्षा, पुनरावृत्ति और सुधार हो सके।
- मुक्त ज्ञान भंडार बनाए रखना। प्रत्येक प्रकाशन, डेटासेट विवरण और फ्रेमवर्क संस्करण को स्थायी रूप से निःशुल्क उपलब्ध रखना।
- शोध क्षमता विकसित करना। संवैधानिक और सामाजिक-विधिक प्रश्नों पर कार्य कर रहे नवोदित शोधकर्ताओं और संस्थागत शोध प्रकोष्ठों को सहयोग देना।