एक संवैधानिक रूप से जागरूक, विधिक रूप से सशक्त और नागरिक रूप से उत्तरदायी भारत।
ऐसा भारत जहाँ संविधान को रोज़मर्रा के अधिकारों, कर्तव्यों और निर्णयों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक के रूप में समझा जाए — न कि केवल औपचारिक अवसरों पर उद्धृत किए जाने वाले किसी दूरस्थ दस्तावेज़ के रूप में।